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टीआरपी के खेल के असली खिलाड़ी आप है

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शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2020

/ by journalist life



गुरु फिल्म में एक बहुत अच्छा डॉयलॉग है," जब लोग आपके खिलाफ बात करने लगें, समझ लो आप तरक्की कर रहे हो ". एक और है भाई.." बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम ना होगा ? टीआरपी के खेल में यह डॉयलोग सटीक बैठते हैं.  हर टीवी चैनल पर रिपब्लिक की चर्चा है. ज्यादातर लोग आज मुंबई कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद रिपब्लिक चैनल पहुंचे होंगे. 

न्यूज चैनलों  में पक्ष, विपक्ष देखते रहिये लेकिन गुटबाजी समझिये. यह आज हो गया है ऐसा नहीं है, मीडिया पहले से गुटों में बटा है. कोई सरकार के साथ है, तो कोई विपक्ष में है, तो कोई जनता के मुद्दों के साथ है. इन गुटों में टीआरपी किस खेमे के साथ है, बताने की जरूरत नहीं है. टीआरपी का पूरा खेल सिर्फ नंबर वन बनने का नहीं है. बात है बिजनेस की, पैसा कमाने की. जिसकी जितनी अच्छी टीआरपी उतना ज्यादा विज्ञापन और उतनी ज्यादी कीमत. 



आप बदलिये मीडिया बदल जायेगा

खेल मीडिया का है ही नहीं, पूरा खेल आपकी पसंद ना पसंद का है. सच तो यह है कि मीडिया के खेमे के साथ आपलोग भी बटे हुए हैं औऱ सच कहूं, तो यहां भी यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस गुटबाजी में कौन किसके साथ है और किसकी संख्या ज्यादा है. असल मुद्दों की चिंता आपको नहीं है तो मीडिया को क्यों होगी. नीचे वाले आर्टिकल में आपके बारे में लिखा है क्लिक करके पढ़ सकते हैं. 

चलिये मान लिया, मीडिया बाजारू है, बिकाऊ है

आप कैसी खबरें देखतें 

गूगल में लगभग 70 फीसद लोग अश्लील चीजें सर्च करते हैं, ज्यादातर वेबसाइट की वैसी खबरें टॉप पर होती है जो या तो अश्लील हैं या जिस खबर में भरकर मसाला डाला गया है. कोई अच्छी खबर जिस पर रिपोर्टर ने मेहनत की, जान पर खेलकर रिपोर्टिंग की सनी लियोनी, पुनम पांडेय, राखी सांवत, के आगे दम तोड़ देती है. पूरा खेल टीआरपी का है तो कोई पत्रकार मेहनत करें क्यों ? इन लोगों के सोशल मीडिया से तस्वीर निकाल कर दिखाता रहे, खबरें बनाता रहे आखिर आपको चाहिए भी तो यही ना. 

टीवी डिबेट पर आपकी राय क्या है ?

अब हालत देखिये आंकड़ों में देश के 76 फीसद लोग मानते हैं कि टीवी डिबेट में बेवजह झगड़ा होता है.  देश में 54 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया है कि वह टीवी समाचार चैनलों को देखकर थक चुके हैं.  यह आंकड़ा आईएएनएस सी-वोटर मीडिया कंजम्पशन ट्रैकर ने सितंबर 2020 में किया है. इन आंकड़ों के बाद भी टीवी डिबेट का विषय नहीं बदला, टीआरपी इसी में है तो किया भी क्या जाए. 

पत्रकारिता जिनकी वजह से जिंदा है उन्हीं की हत्या हो रही है

टीबी डिबेट  में सबसे ज्यादा टीआरपी देता है पाकिस्तान  

एक और आंकड़ा देखिये, थोड़ा पुराना है लेकिन सच आज भी बदला नहीं है. 19 अक्टूबर 2019 तक टीवी में हुई चर्चांओं पर एक आंकड़ा तैयार किया गया जिसे तैयार किया पीइंग ह्यूमन ( सुनों सलमान बीइंग ह्यूमन है वो वाला अलग है ये दूसरा वाला है) अब देखिये टीवी में सबसे ज्यादा चर्चा हुई.

पाकिस्तान की टीवी में इस पर 79 बहस हुई यह आंकड़ा  आज तक, न्यूज़ 18, ज़ी न्यूज़ और इंडिया टीवी- पर दिखाई जाने वाली अंतिम 202 बहसों से निकाला गया. पाकिस्तान के बाद चर्चा हुई  विपक्ष (नेहरू सहित) पर हमले से जुड़ी जिसकी 66 बहस की गयी. ऐसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन अर्थव्यवस्था: 0 बेरोजगारी: 0 शिक्षा: 0 स्वास्थ्य सेवा: 0 पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: 0 किसानों की बदहाली: 0 गरीबी और कुपोषण: 0 महिलाओं की सुरक्षा: 0 पर्यावरण संरक्षण: 0



 

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